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वर्षा -ऋतु(Varsha Ritu) 2026 हिंदी- निबंध लिखने का TRICK

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वर्षा ऋतु निबंध, Varsha Ritu nibandh, rainy season essay, important essay for examination  ऋतुओं की रानी वर्षा, वर्षा का आगमन, वर्षा का प्रकृति पर प्रभाव, वर्षा से लाभ, वर्षा से नुकसान, वर्षा ऋतु में होने वाली बीमारियां, निष्कर्ष यदि बसंत ऋतुओं का राजा है तो वर्षा ऋतुओं की रानी है। वर्षा -ऋतु के आते ही आसमान में काले- काले बादल छा जाते हैं। मेघ घमंडी हाथियों की तरह गरज- गरज कर लोगों को डराने लगता है। घनघोर वर्षा होने लगती है। चारों ओर हरियाली छा जाती है। मानो प्रकृति रानी ने जैसे हरी चादर ओढ़ ली हो। काले- काले बादल देख मोर अपने पंख फैलाकर वनों में नाचने लगते हैं। पपीहे, दादुर, झींगुर की आवाज़ें प्रकृति में गूंज उठती है। ताल तलैया भर जाते हैं।  ग्रीष्म   ऋतु की मार से तपति धरा तृप्त हो जाती है। बागों में झूले लग जाते हैं। नव तरुणियों के मन उल्लसित हो जाते हैं।  नदियों में जल भर जाता है और उनका वेग भी बढ़ जाता है। मानो इतराती हुई अपने प्रियतम सागर से मिलने जा रही हो। और  किसानों की खुशियों की तो बात ही ना पूछो। वह हल बैल के लेकर अपने खेत की ओर निकल पड़ते हैं...

पर्यायवाची / समानार्थी शब्द

  पर्यायवाची / समानार्थी शब्द ​ — BY Dr. Umesh HINDI Academy ​लगभग एक समान अर्थ प्रदान करने वाले शब्दों को पर्यायवाची अथवा समानार्थी शब्द कहते हैं। प्रमुख पर्यायवाची शब्दों की सूची — ​ अमृत — अमिय, सोम, सुधा, पीयूष, जीवनोदक, अमी। ​ अग्नि — आग, पावक, दाहक, ज्वाला, वह्नि, वायुसखा, दहन। ​ अम्ब — अम्बा, माँ, माता, जननी, धात्री, अम्बिका। ​ अनुपम — अतुल, अपूर्व, अद्वितीय, अनोखा, अद्भुत, अनन्य। ​ असुर — दैत्य, दनुज, दानव, राक्षस, यातुधान, निशिचर, रजनीचर, तमीचर। ​ अम्बर — आकाश, नभ, द्यौ, व्योम, गगन, शून्य, अंतरिक्ष, आसमान, अनन्त, अभ्र। ​ अचल — भूधर, गिरि, पहाड़, पर्वत, नग, कूट। ​ अच्छा — शुभ, उचित, उपयुक्त, शोभन। ​ अनिल — हवा, मारूत, वात, समीर, पवन, वायु, बयार, प्रकम्पन। ​ अश्व — घोड़ा, घोटक, हय, सैन्धव, तुरंग, वाजि। ​ अनुचर — नौकर, दास, सेवक, भृत्य, परिचारक, चाकर, किंकर। ​ अन्य — दूसरा, भिन्न, पृथक। ​ अमर — देवता, अनिमेष, सुर, निर्जर, विबुध, देव, त्रिदश, गीर्वाण, आदित्य।

Kshitij part 2 Hindi ncert सूरदास के पद पाठ 1 class 10 questions answers

     Kshitij part 2 Hindi ncert सूरदास के पद पाठ 1 class 10 ( 2026-27) यह पाठ दसवीं कक्षा की हिंदी पुस्तक क्षितिज 2 से ली गई है। यहां सूरदास जी द्वारा रचित पद उसके भावार्थ, प्रश्न उत्तर दिए गए हैं जो छात्र छात्राओं के लिए अत्यंत उपयोगी है। ऊधौ, तुम हो अति बड़भागी। मन की मन ही मांझी रही। अर्थ, व्याख्या, प्रश्न उत्तर MCQ  पठित पदों की सूची  १.ऊधौ तुम हौ अति बड़भागी । २. मन की मन ही मांझी रही। ३. हमारैं हरि हासिल की लकड़ी। ४. हरि हैं राजनीति पढिआए Kshitij part 2 , 10th class Hindi के छात्र छात्राओं के लिए यहां पाठ 1 से सूरदास के पदों की संपूर्ण व्याख्या , शब्दार्थ, प्रश्न उत्तर विस्तार से दिए जा रहे हैं जिससे विद्यार्थी बंधू भगिनी को लाभ हो। महाकवि सूरदास जी की जीवनी और उनके पद भी दिए गए हैं।   सूरदास का जीवन परिचय सूरदास हिंदी साहित्य के चमकते सूर्य के समान हैं। इनका जन्म मथुरा के समीप रुनकता अथवा रेणुका क्षेत्र में 1478 ई में हुआ था। इनकी पारिवारिक स्थिति के बारे में जानकारी नहीं मिलती। माता पिता अथवा परिवार के अन्य सदस्यों के विषय में जानकारी नहीं है। ...

हम करेंगे आज भारत देश का जयगान, ( 2026-27)HM karenge aaj bharat

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  जयगान Jaygan poem question answer ( 2026-27) हम करेंगे आज भारत देश का जयगान। द्वेध दुख का अंत होगा, अब न त्रास दुरंत होगा,  अब फहरेगा हमारा एक विजय निशान! हम करेंगे आज भारत देश का जयगान ! यश का गान ! रजत श्रंग तुषार शेखर, तुंग यह हिमवान गिरिवर, हम यहां निर्दवंद्व होकर, बनेंगे गतिवान ! हम करेंगे आज भारत भूमि का जयगान ! यश का गान ! पोत – दल शत शत तरेंगे, पश्चिमी सागर भरेंगे, गर्जना में ध्वनित होगा, देश गौरव मान ! हम करेंगे आज भारत देश का जयगान ! यश का गान! बने विद्या भवन शोभन, देव मंदिर से सुपावन हम करेंगे देश भारत, ज्ञान वृद्ध महान ! हम करेंगे आज भारत देश का जयगान ! यश का गान !  कवि सुब्रमण्यम भारती। मेरे youtube channel Dr.Umesh Hindi Academy भी देखें। शब्दार्थ द्वेध – दो प्रकार के ‌। अंत – समाप्त ।  त्रास – दुख । दुरंत – प्रबल, प्रचंड । गिरि – पर्वत । गति – चाल । तुषार शेखर – बर्फ का घर , हिमालय। जग जीवन में जो चिर महान (क्लिक करें और पढ़ें) हम असत्य से बचें, सत्य पर चलें (क्लिक करें और पढ़ें) यश – प्रसिद्धि। पोत दल – नौकादल । शत – सौ । ध्वनित – गुंजायमान। सुपावन...

Phuta prabhat (poem) (2026 - 27 ) question answer फूटा प्रभात कविता का भाव सौंदर्य, प्रश्न उत्तर

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  फूटा प्रभात ( कविता )  phuta prabhat poem summary,  questions answers , phuta prabhat poem ke poet Bharat Bhushan Agarwal, फूटा प्रभात कविता का सप्रसंग व्याख्या  फूटा प्रभात कवि भारत भूषण अग्रवाल की प्रकृति चित्रण संबंधित रचना है। इस कविता में कवि ने सुबह सवेरे के प्राकृतिक सुषमा का सुंदर चित्रण किया है। यहां कविता , व्याख्या और प्रश्न उत्तर दिया गया है। फूटा प्रभात, फूटा विहान  बह चले रश्मि के प्राण, विहग के गान, मधुर निर्झर के स्वर  झर - झर , झर - झर। प्राची का अरुणाभ क्षितिज, मानो अंबर की सरसी में  फूला कोई रक्तिम गुलाब, रक्तिम सरसिज। धीरे-धीरे, लो, फैल चली आलोक रेख  घुल गया तिमिर, बह गयी निशा, चहुं ओर देख , धुल रही विभा, विमलाभ कांति। अब दिशा - दिशा  सस्मित  विस्मित खुल गये द्वार , हंस रही उषा। खुल गये द्वार, दृग खुले कंठ  खुल गये मुकुल  शतदल के शीतल कोषों से निकला मधुकर गुंजार लिये खुल गये बंध, छवि के बंधन। जागी जगती के सुप्त बाल! पलकों की पंखुड़ियां खोलो, खोलो मधुकर के आलस बंध  दृग भर  समेट तो लो यह श्री, यह क...

नदी का रास्ता कविता का भावार्थ,( 2026-27)शब्दार्थ और प्रश्न उत्तर,नदी को रास्ता किसने दिखाया,Nadi ka rasta poem, explain,poet Balkrishan rao

  नदी का रास्ता कविता का भावार्थ, शब्दार्थ और प्रश्न उत्तर,नदी को रास्ता किसने दिखाया,Nadi ka rasta poem, explain,poet Balkrishan rao 2026-27 विषय सूची Question answer  नदी का रास्ता कविता नदी का रास्ता कविता का शब्दार्थ नदी का रास्ता कविता का भावार्थ नदी का रास्ता कविता का प्रश्न उत्तर Nadi ka rasta poem question answer, poem explanation 2026  -27 exam special poem question answer  Nadi ka rasta poem, नदी का रास्ता कविता, कवि बाल कृष्ण राव नदी को रास्ता किसने दिखाया  सिखाया था उसे किसने कि अपने भावना के वेग को उन्मुक्त बहने दे, कि वह अपने लिए खुद खोज लेगी सिंधु की गंभीरता स्वच्छंद बहकर ? इसे हम सुनते आए युगों से, और सुनते ही युगों से आ रहे उत्तर नदी का -- मुझे कोई कभी आया नहीं था राह दिखलाने, बनाया मार्ग मैंने आप ही अपना  । ढकेला था शिलाओं को, गिरी निर्भीकता से मैं कई ऊंची प्रपातों से, वनों से कंदराओं में भटकती भूलती मैं फूलती उत्साह से प्रत्येक बाधा विघ्न को ठोकर लगाकर ठेलकर बढ़ती गई आगे निरंतर एक तट को दूसरे से दूरतर करती। बढ़ी सम्पन्नता के साथ और अपने द...

पत्रकारिता किसे कहते हैं? पत्रकारिता के प्रकार, पत्रकारिता के मुख्य आयाम, अच्छे पत्रकार के गुण

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  पत्रकारिता किसे कहते हैं? पत्रकारिता के प्रकार, पत्रकारिता के मुख्य आयाम, अच्छे पत्रकार के गुण  विषय सूची  1. पत्रकारिता किसे कहते हैं? 2.पत्रकारिता के मुख्य आयाम  3. पत्रकारिता के प्रकार  अच्छे पत्रकार के गुण। प्रिय साथियों! इस लेख में हमलोग लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पत्रकारिता के बारे में जानकारी प्राप्त करें। पत्रकारिता किसे कहते हैं ? पत्रकारिता के मुख्य आयाम क्या है ? पत्रकारिता के कितने प्रकार होते हैं तथा एक अच्छे पत्रकार में क्या क्या गुण होने चाहिए।साथ ही पीत पत्रकारिता, वाचडाग पत्रकारिता आदि के विषय में जानकारी प्राप्त करेंगे जिससे  11वीं कक्षा और 12वीं कक्षा के छात्र छात्राओं को विशेष लाभ प्राप्त हो। 1.पत्रकारिता किसे कहते हैं ? पत्रकारिता आधुनिक समाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि देश विदेश में घटने वाली घटनाओं, सूचनाओं और विचारों को संकलित करके उन्हें संपादित करना और उन्हें जनता तक पहुंचाना ही पत्रकारिता है। पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ माना जाता है।यह समाज में पारदर्शिता बनाए रखने और शासन प्रशासन को जवाब...

मां, कह एक कहानी, कविता का सरल अर्थ और प्रश्न उत्तर (2026) मैथिली शरण गुप्त, ma kah ek kahani

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                      By Dr. Umesh Kumar Singh  मां , कह एक कहानी, कविता, मैथिली शरण गुप्त Maa kh ek kahani question answer  मां ,कह एक कहानी , कविता राष्ट्र कवि मैथिलीशरण गुप्त द्वारा विरचित ' यशोधरा ' नामक ग्रंथ से ली गई है। यहां कवि ने महात्मा बुद्ध के बचपन की प्रवृतियों का बहुत सुंदर वर्णन किया है। महात्मा बुद्ध बचपन से ही दयालु और अहिंसा के समर्थक थे। यहां उनकी पत्नी यशोधरा अपने पुत्र राहुल को यह बातें बता रही हैं।  मां, कह एक कहानी, Maa , kah ek kahani, Maithli Sharan Gupt मां कह एक कहानी कविता, कवि मैथलीशरण गुप्त, मां कह एक कहानी कविता कविता भावार्थ, प्रश्न उत्तर, मां कह एक कहानी, यह कथन किसका है ? यह कथन राहुल का है। मां कह एक कहानी,बेटा समझ लिया क्या तूने मुझको अपनी नानी। और अंत में अपने प्यारे छात्र छात्राओं के लिए महत्वपूर्ण सुझाव। Kavita, poem, कविता  "मां , कह एक कहानी !" " बेटा समझ लिया क्या तूने मुझको अपनी नानी ?" " कहती है मुझसे यह चेंटी, तू मेरी नानी की बेटी। कह मां, कह लेटी ही लेटी, राजा था या र...

रजनी, एकांकी ,( 2026 exam special)लेखिका मन्नू भंडारी, Rajni ,Mannu Bhandari

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  रजनी, एकांकी, लेखिका मन्नू भंडारी, Rajni, Mannu Bhandari मन्नु भंडारी का जीवन परिचय , रजनी पाठ का प्रश्न उत्तर question answer for 2026 exam special  रजनी सुप्रसिद्ध लेखिका मन्नू भंडारी द्वारा लिखित एक प्रसिद्ध एकांकी है जिसमें विभिन्न विद्यालयों में ट्यूशन के नाम पर छात्रों के शोषण का जीवन्त वर्णन किया गया है। साथ ही  शासन - प्रशाासन की अकर्मण्यता  भी दर्शाया गया है।   यहां एकांकी का सारांश, प्रश्न उत्तर, शब्दार्थ और संदेश का वर्णन किया गया है जिससे पाठकों में जागरूकता पैदा हो। ग्यारहवीं कक्षा में इसका अध्यापन होता है। रजनी एकांकी का सारांश, रजनी एकांकी का पात्र परिचय, रजनी एकांकी पाठ से हमें क्या शिक्षा मिलती है ? रजनी पाठ का प्रश्न उत्तर, ग्यारहवीं कक्षा हिन्दी प्रश्न उत्तर, लेखिका मन्नू भंडारी का जीवन परिचय। शिक्षक ट्यूशन की लालच में छात्रों का शोषण कैसे करते हैं ? लेखिका मन्नू भंडारी का जीवन परिचय Mannu Bhandari  मन्नू भंडारी का असली नाम महेंद्र कुमारी था। इनका जन्म 1931 ई. में राजस्थान के भानपुरा नामक स्थान में हुआ था। नई कहानी के आंदोलन में इ...

यमुना जयंती 24 मार्च को , क्या आपको पता है ? चैत्र शुक्ल षष्ठी को प्रकट हुई थी यमुना । चैत्र मास शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को देवी यमुना का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था

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 यमुना जयंती 24 मार्च को ,  क्या आपको पता है ? चैत्र शुक्ल षष्ठी को प्रकट हुई थी यमुना । यमुना जयंती 24 मार्च को मनाया जाता है। यमुना जयंती पर विशेष । तपन शमन, अघ हरण, मुद मंगल की खान। जय यमुना मैया, करो सबका कल्याण॥" यमुना जयंती: भक्ति, मुक्ति और पावनता का संगम ​ यमुना जयंती चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी पावन तिथि को सूर्यपुत्री और यमराज की बहन माँ यमुना का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। ब्रज संस्कृति और भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं की साक्षी होने के कारण यमुना जी का आध्यात्मिक महत्व अतुलनीय है। ​यमुना जी को केवल एक नदी नहीं, बल्कि 'मोक्षदायिनी' माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, जो भक्त इस दिन श्रद्धापूर्वक यमुना जल में स्नान और पूजन करते हैं, उन्हें यमराज के भय से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि का संचार होता है। विशेषकर विश्राम घाट (मथुरा) और प्रयागराज में इस दिन अद्भुत छटा देखने को मिलती है। ​आज के इस आधुनिक युग में यमुना जयंती हमें अपनी नदियों को स्वच्छ और निर्मल रखने का संकल्प लेने की...