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A biography of Sister Nivedita, भगिनी निवेदिता का जीवन परिचय

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 A biography of Sister Nivedita, भगिनी निवेदिता का जीवन परिचय । भारत में योगदान। स्वामी विवेकानंद की शिष्या भगिनी निवेदिता भगिनी निवेदिता एक ऐसा नाम है जिसे सुनकर मन में एक ऐसी दया, करुणा और मानवता की प्रतिमूर्ति अंकित हो जाती है जिसके आगे हमारा मस्तक श्रद्धा से झुक जाता है। उन्होंने विदेश में जन्म लेने के बाद भी भारत की गरीबी और इसके गुलामी को बखूबी समझते हुए इन समस्याओं को दूर करने का प्रयास किया। स्वामी विवेकानन्द जी की शिष्या भगिनी निवेदिता गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की प्रेरणा स्रोत थी। सुरेन्द्र नाथ बनर्जी, गोपाल कृष्ण गोखले, विपिन चन्द्र पाल, अरविंद घोष जैसे प्रमुख नेता उनके मित्र थे, बाल गंगाधर तिलक, महात्मा गांधी भी उनके प्रति श्रद्धा भाव रखते थे। विषय सूची भगिनी निवेदिता का जन्मदिन भगिनी निवेदिता का असली नाम भगिनी निवेदिता के माता-पिता भगिनी निवेदिता का स्वामी विवेकानंद जी से भेंट। भगिनी निवेदिता का भारत आगमन भगिनी निवेदिता द्वारा विद्यालय की स्थापना भगिनी निवेदिता द्वारा प्लेग पीड़ितों की सेवा भगिनी निवेदिता का स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान भगिनी निवेदिता का महाप्रयाण सिस्...

भ्रष्टाचार( bharshtachar) corruption upsc ki tyari shuru kar do, uske liye nibandh aise likhna hai

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भ्रष्टाचार पर निबंध, bharshtachar pr nibandh. Essay on Curruption, in hindi for upsc exam preparation    भ्रष्टाचार संसार में सच्ची मानवता के लिए कलंक है। रिश्र्वत खोरी, भाई भतीजावाद, मिलीवट, पद का दुरुपयोग सहित अपने दायित्व में लापरवाही आदि इसके कितने रूप हैं। व्यक्तिक और प्रशासनिक स्तर पर इसे समाप्त करने के उपायों की आवश्यकता है। विषय सूची 1.भ्रष्टाचार का आशय क्या है। 2. भ्रष्टाचार के रूप या प्रकार 3. भ्रष्टाचार के दुष्प्रभाव 4. भ्रष्टाचार होने के कारण 5. भ्रष्टाचार दूर करने के उपाय भ्रष्टाचार का आशय, what is curruption in hindi, bhrastachar kise kahte hai भ्रष्टाचार का आशय भ्रष्ट आचार विचार, व्यवहार आदि से है। संसार में इस अदृश्य दानव की उत्पत्ति कब और कैसे हुई यह बतलाना तो बड़ा ही मुश्किल है लेकिन आज यह दुनिया के सभी देशों के विकास को लगभग अपने महा पाश में जकड़ लिया है। इसके कारण व्यक्ति, समाज, देश, विश्व, सभी त्रस्त हैं। और विकास के दौर नव निर्माण से गुजर रहा हमारा देश भारतवर्ष तो पूरी तरह भ्रष्टाचार के दलदल में धंस चुका है.यही कारण है कि प्रगति और विकास की सभी योजनाओं का...

परोपकार propkar, परोपकार पर नये TRICK से निबंध लिखें और अधिक नम्बर पायें

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  परोपकार , propkar essay परोपकार क्या है, propkar kya hai परोपकारी के गुण, propkar ke goon तुलसी दास का परोपकार पर मत वर्तमान में परोपकार की दशा, propkar ki dasa    परोपकार पर अनुच्छेद, propkar pr anukshed परोपकार पर निबंध ,propkar pr nibandh परोपकार के परिणाम propkar ke prinam परोपकार पर 100 शब्दों में निबंध परोपकार पर कविता  आहार, निद्रा, भय, विलाप, भावना आदि सभी चीजें मनुष्य और पशुओं में सामान्य रूप से विद्यमान रहती हैं। लेकिन धर्म ही वह मूल विशेषता है जो मनुष्यों और पशुओं को पृथक करता है। धर्म के अभाव में मनुष्य पशुओं से भी निम्न हो जाता है। यही धर्म है और यही परोपकार है। सच्चा  हितैषी निबन्ध  ।  क्लिक करें और पढ़ें। नींद नींद अलम्मंच, सामान्यमेत पशुबलि: नारायणाय! धर्मोहि तेषामधिको विशेषांक, धर्मनेनहीन पशुभिः समानः।   तुलसीदास जी ने कहा है,  परहित सरिस धर्म नहिं भाई। परपीड़ा   सम नहीं अधमाई ।। मनुष्य केवल अपने लिए जिने वाला प्राणी नहीं है। वह स्वार्थी केवल नहीं है, बल्कि परोपकारी है। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और समाज में रहकर...

Raja Puru ( Porus ) and Sikandar, राजा पुरू ( पोरस) और सिकन्दर की कहानी

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 Raja Puru ( Porus ) and Sikandar, राजा पुरू ( पोरस) और सिकन्दर की कहानी Table of contents 1.सिकन्दर कौन था ? 2. केकय राज्य और राजा पुरू 3. पुरू के अन्य दरबारी 4. पुरू सिकन्दर युद्ध 5.पुरू सिकन्दर युद्ध के परिणाम 6. पुरु की मृत्यु। Sikandar kaun tha Kekay rajya aur raja Puru Puru ke darbari Battle of Puru and Sikandar Results of Puru and Sikandar battle Death of Puru  सिकन्दर कौन था यूनान देश का यवन शासक सिकन्दर बहुत क्रूर और घमंडी था। उसनेे विश्व विजय का दंभ भरते हुए ख़ैबर दर्रा के रास्ते ई पू 326 में भारत पर आक्रमण किया था। उस समय भारत के उत्तर पश्चिमी राज्य छोटे छोटे टुकड़ों में विभाजित थे। गंधार का राजा आंभी सिकन्दर से डरकर उसकी अधीनता स्वीकार कर लिया। उसने सोचा कि सिकन्दर आंधी की तरह आया है और कुछ ही दिनों में वापस चला जाएगा। इसलिए उससे पंगा लेना बुद्धिमानी नहीं है। इसलिए आंभी ने बड़ी आसानी से सिकन्दर की सारी शर्तें मान ली। केकय राज्य और राजा पुरू केकय राज्य पंजाब में झेलम नदी और चिनाव नदी के मध्य में झेलम, गुजरात और शाहपुर जिले तक फैला हुआ था। भारत के पश्चिमोत्तर सीमा पर...